मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...! मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...!
नन्ही सी बिटिया थी वह तूफ़ानी रात को आयी थी ! नन्ही सी बिटिया थी वह तूफ़ानी रात को आयी थी !
माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़वा। माँ से सुन तारीफ इतनी मेरा मन कुछ बदला, सोचा खा लेती हूँ माना बहुत है कड़व...
बाग़ में जब तक उसे न देख लूँ मेरी सुबह की सैर जैसे अधूरी है। बाग़ में जब तक उसे न देख लूँ मेरी सुबह की सैर जैसे अधूरी है।
देश देखता राह तुम्हारी बच्चों भारतवर्ष के, मेहनत और परिश्रम से उन्नति ले आओ अर्श से। देश देखता राह तुम्हारी बच्चों भारतवर्ष के, मेहनत और परिश्रम से उन्नति ले आओ ...
लेकिन वह बूढ़ा सिंह माना नहीं, उसे घसीट कर ले गया नदी के किनारे। लेकिन वह बूढ़ा सिंह माना नहीं, उसे घसीट कर ले गया नदी के किनारे।
क्या वास्तव में हम इंसान समय की यात्रा कर सकते हैं? समय सीमा पार कर, भूत और भविष्य में? क्या वास्तव में हम इंसान समय की यात्रा कर सकते हैं? समय सीमा पार कर, भूत और भवि...
'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की ऊंचाई नापना, बचपन क... 'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की...
यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी । यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी ।
फिर भी बात तो एक थी प्यारी -प्यारी यादों को समेटकर उसमें रखना। फिर भी बात तो एक थी प्यारी -प्यारी यादों को समेटकर उसमें रखना।
गया था चूहा इक दिन खाने अनाज बाजार में! गया था चूहा इक दिन खाने अनाज बाजार में!
तू क्या जाने भेद इस जग का, मैं हर कण का ज्ञान दिलाऊंगी। तू नन्हीं सी चिड़िया मेरी। तू क्या जाने भेद इस जग का, मैं हर कण का ज्ञान दिलाऊंगी। तू नन्हीं सी चिड़िया मे...
मिल सकता है तुम को भी आदर और सम्मान। मिल सकता है तुम को भी आदर और सम्मान।
नई पौध के नौनिहालों , सीख लो तुम भी पेड उगाना ! नई पौध के नौनिहालों , सीख लो तुम भी पेड उगाना !
जिंदगी के इस सफर में मैंने उससे सीखा है। जिंदगी के इस सफर में मैंने उससे सीखा है।
कहानी हो या वास्तविकता जीत हम सब जानते हैं बिना रुके मंजिल की ओर बढ़ना इस निरंतरता को। कहानी हो या वास्तविकता जीत हम सब जानते हैं बिना रुके मंजिल की ओर बढ़ना इस निरं...
कितने सुंदर लगते हैं ये , पके पके से आम। तोतापरी दशहरी लंगड़ा , कर्नाटक बादाम। कितने सुंदर लगते हैं ये , पके पके से आम। तोतापरी दशहरी लंगड़ा , कर्नाटक...
शिक्षक एक प्रवाह है । मंज़िल नहीं राह है ।। शिक्षक पवित्र है। शिक्षक एक प्रवाह है । मंज़िल नहीं राह है ।। शिक्षक पवित्र है।
चलो ना ! ले चलते हैं अपने साथ प्यारा-सा ये बादल। चलो ना ! ले चलते हैं अपने साथ प्यारा-सा ये बादल।
एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...! एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...!